Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.d61: इसी प्रकार वानप्रस्थ आश्रम का सनातन धर्म बताया गया है। वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को एकनिष्ठ निश्चय करके घर-बार छोड़कर वन में चले जाना चाहिए और वन में उपलब्ध उत्तम आहार पर ही जीवन निर्वाह करना चाहिए। यही उसके लिए शास्त्रोक्त मर्यादा है। | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार वानप्रस्थ आश्रम का सनातन धर्म बताया गया है। वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को एकनिष्ठ निश्चय करके घर-बार छोड़कर वन में चले जाना चाहिए और वन में उपलब्ध उत्तम आहार पर ही जीवन निर्वाह करना चाहिए। यही उसके लिए शास्त्रोक्त मर्यादा है।
Similarly, the Sanatan Dharma of Vanaprastha Ashram has been described. A man who wishes to enter Vanaprastha Ashram should make a single-minded decision and leave his home and go to the forest and live his life only on the best food available in the forest. This is the scriptural limit for him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥