श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d58
 
 
श्लोक  13.146.d58 
श्रीमहेश्वर उवाच
तथाश्रमगतं धर्मं शृणु देवि समाहिता।
आश्रमाणां तु यो धर्म: क्रियते ब्रह्मवादिभि:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- देवी! आश्रमधर्म का वर्णन एकाग्रचित्त होकर सुनो। ब्रह्मवादी ऋषियों ने जो आश्रमधर्म निश्चित किया है, वही यहाँ बताया जा रहा है।
 
Shri Maheshwar said- Devi! Listen to the description of the ashramdharma with concentration. The dharma of the ashrams which has been decided by the Brahmavadi sages is being told here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)