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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
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श्लोक d57
श्लोक
13.146.d57
उमोवाच
(भगवन् देवदेवेश नमस्ते वृषभध्वज।
श्रोतुमिच्छाम्यहं देव धर्ममाश्रमिणां विभो॥
अनुवाद
उमा बोलीं- प्रभु! देवदेवेश्वर! वृषभध्वज! भगवान! आपको नमस्कार है। प्रभु! अब मैं आश्रमवासियों का धर्म सुनना चाहती हूँ।
Uma said-Lord! Devdeveshwar! Taurus flag! God! Greetings to you. Lord! Now I want to hear the religion of the Ashramites.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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