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mahabharat 13.146.d53: इसी प्रकार शूद्रों को भी सभी धर्मों का साधक कहा गया है। यदि शूद्र न हों, तो सेवा का कार्य करने वाला भी कोई नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.d53 
(तथैव शूद्रा विहिता: सर्वधर्मप्रसाधका:।
शूद्राश्च यदि ते न स्यु: कर्मकर्ता न विद्यते॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार शूद्रों को भी सभी धर्मों का साधक कहा गया है। यदि शूद्र न हों, तो सेवा का कार्य करने वाला भी कोई नहीं है।
 
Similarly, Shudras are also said to be seekers of all religions. If there are no Shudras, then there is no one to do the work of service.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)