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तप एव सदा धर्मो ब्राह्मणस्य न संशय:।
स तु धर्मार्थमुत्पन्न: पूर्वं धात्रा तपोबलात्॥ )
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि ब्राह्मण का कर्तव्य सदैव तप करना है। पूर्वकाल में विधाता ने अपने तप बल से ब्राह्मणों को धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए उत्पन्न किया था।
There is no doubt that the duty of a Brahmin is to always perform penance. In the past, the Creator had created Brahmins with his power of penance to perform religious rituals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥