Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.d43-d45: जो काम, लोभ और मोह के वशीभूत होकर ब्राह्मणों का अपमान या निन्दा करता है, उन्हें क्रोधित करता है, उन पर आक्रमण करता है, उनका धन चुराता है, अथवा उनसे नीच कर्म करवाता है, वह दुष्ट मेरा अपमान या निन्दा करता है। वह मुझे क्रोधित करता है, मुझ पर आक्रमण करता है, वह मूर्ख मेरा धन चुराता है और वह मूर्ख व्यक्ति मुझे इधर-उधर भेजकर मुझसे नीच कर्म करवाता है और मेरी निन्दा करता है। | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो काम, लोभ और मोह के वशीभूत होकर ब्राह्मणों का अपमान या निन्दा करता है, उन्हें क्रोधित करता है, उन पर आक्रमण करता है, उनका धन चुराता है, अथवा उनसे नीच कर्म करवाता है, वह दुष्ट मेरा अपमान या निन्दा करता है। वह मुझे क्रोधित करता है, मुझ पर आक्रमण करता है, वह मूर्ख मेरा धन चुराता है और वह मूर्ख व्यक्ति मुझे इधर-उधर भेजकर मुझसे नीच कर्म करवाता है और मेरी निन्दा करता है।
He who insults or slanders Brahmins or makes them angry or attacks them or steals their wealth or makes them do lowly deeds under the influence of lust, greed and attachment, that wretch insults or slanders me. He makes me angry, attacks me, that fool steals my wealth and that foolish person sends me here and there and makes me do lowly deeds and slanders me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥