श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d38
 
 
श्लोक  13.146.d38 
मुखतो ब्राह्मणा: सृष्टास्तस्मात् ते वाग्विशारदा:॥
बाहुभ्यां क्षत्रिया: सृष्टास्तस्मात् ते बाहुगर्विता:।
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों की उत्पत्ति भगवान के मुख से हुई है, इसीलिए वे वाणी में निपुण हैं। क्षत्रियों की उत्पत्ति दो भुजाओं से हुई है, इसीलिए उन्हें अपने शारीरिक बल पर गर्व है।
 
Brahmins were created from the mouth of the Creator, that is why they are experts in speech. Kshatriyas were created with two arms, that is why they are proud of their physical strength.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)