श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d37
 
 
श्लोक  13.146.d37 
यदीदमेकवर्णं स्याज्जगत‍् सर्वं विनश्यति॥
सहैव देवि वर्णानि चत्वारि विहितान्यत:।
 
 
अनुवाद
हे देवी! यदि यह सम्पूर्ण जगत एक ही रंग का होता, तो सब कुछ एक साथ नष्ट हो जाता। इसीलिए विधाता ने चार वर्णों की रचना की है।
 
Goddess! If this whole world were of only one colour, then everything would have been destroyed together. That is why the Creator has created four varnas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)