श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d30
 
 
श्लोक  13.146.d30 
नमो घोरतराद् घोर नमो रुद्राय शङ्कर।
नम: शान्ततराच्छान्त नमश्चन्द्रस्य पालक॥
 
 
अनुवाद
हे रुद्रदेव! आप जो उग्र से भी उग्र हैं! शंकर! मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ। हे शिव! आप जो शान्त से भी शान्त हैं! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे चन्द्रमा के रक्षक! मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
 
O Rudradev, who is fiercer than the fiercest of all! Shankar! I salute you again and again. O Shiva, who is calmer than the calmest of all! I salute you. O protector of the moon! I salute you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)