श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d26
 
 
श्लोक  13.146.d26 
यद्यहं विपरीत: स्यामेतत् त्यक्त्वा शुभानने।
तदैव सर्वलोकानां विपरीतं प्रवर्तते॥
 
 
अनुवाद
शुभान्ने! यदि मैं इस स्वरूप को छोड़कर इसके विपरीत हो जाऊँ, तो उसी समय समस्त लोकों की स्थिति विपरीत हो जाएगी।
 
Shubhanane! If I leave this form and become its opposite, then at the same time the condition of all the worlds will become opposite.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)