श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  13.146.d23 
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं कथयिष्यामि शृणु तत्त्वं समाहिता।
द्विविधो लौकिको भाव: शीतमुष्णमिति प्रिये॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- प्रिये! मैं तुम्हें इसका वास्तविक कारण भी बताता हूँ, तुम एकाग्र होकर सुनो। संसार के सभी पदार्थ दो भागों में विभक्त हैं- शीत और उष्ण (अग्नि और सोम)।
 
Shri Maheshwar said- Dear! I will tell you the real reason for this also, you listen with concentration. All the substances in the world are divided into two parts- cold and hot (fire and soma).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)