vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
»
श्लोक d12
श्लोक
13.146.d12
पिनाकं नाम मे चापं शार्ङ्गं नाम हरेर्धनु:॥
तृतीयमवशेषेण गाण्डीवमभवद् धनु:।
अनुवाद
मेरे धनुष का नाम पिनाक था और श्री हरि के धनुष का नाम शार्ङ्ग था। उस वेणु के अवशेष से एक तीसरा धनुष बनाया गया, जिसका नाम गांडीव रखा गया।
My bow was named Pinaka and Shri Hari's bow was named Sharanga. A third bow was made from the remains of that Venu, which was named Gandiva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×