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श्लोक  13.146.d12 
पिनाकं नाम मे चापं शार्ङ्गं नाम हरेर्धनु:॥
तृतीयमवशेषेण गाण्डीवमभवद् धनु:।
 
 
अनुवाद
मेरे धनुष का नाम पिनाक था और श्री हरि के धनुष का नाम शार्ङ्ग था। उस वेणु के अवशेष से एक तीसरा धनुष बनाया गया, जिसका नाम गांडीव रखा गया।
 
My bow was named Pinaka and Shri Hari's bow was named Sharanga. A third bow was made from the remains of that Venu, which was named Gandiva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)