श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d104
 
 
श्लोक  13.146.d104 
सर्वयज्ञप्रणीतस्य हयमेधेन यत् फलम्।
वर्षे स द्वादशे देवि फलेनैतेन युज्यते॥ )
 
 
अनुवाद
देवि! समस्त यज्ञों को पूर्ण करने वाले मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ करने से जो फल मिलता है, वही फल इस गृहस्थ को बारह वर्षों तक उपर्युक्त नियमों का पालन करने से प्राप्त होता है।
 
Devi! The fruit that a person who has completed all the sacrifices gets from performing Ashwamedha sacrifice, the same fruit is obtained by this householder by following the above-mentioned rules for twelve years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)