Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.146.d103: जो बुद्धिमान पुरुष अपने काम में आई हुई वस्तुओं के लिए कभी शोक नहीं करता, जो यह जानकर संतुष्ट रहता है कि इन सब बातों का पालन करना ही मेरा कर्तव्य है, उसे जो फल मिलता है, उसका वर्णन सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d103
 
 
श्लोक  13.146.d103 
उपयुक्तं च यत् तेषां मतिमान् नानुशोचति।
धर्म इत्येव संकल्प्य यस्तु तस्य फलं शृणु॥
 
 
अनुवाद
जो बुद्धिमान पुरुष अपने काम में आई हुई वस्तुओं के लिए कभी शोक नहीं करता, जो यह जानकर संतुष्ट रहता है कि इन सब बातों का पालन करना ही मेरा कर्तव्य है, उसे जो फल मिलता है, उसका वर्णन सुनो।
 
A wise man who never laments for the things which have come to his use, who remains content knowing that it is his duty to follow all these things, listen to the description of the reward he gets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)