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mahabharat 13.146.99: वालखिल्य तप द्वारा सिद्धि प्राप्त ऋषि हैं। वे सब धर्मों के ज्ञाता हैं और सूर्यमण्डल में निवास करते हैं। वहाँ वे निःस्वार्थता का आचरण करते हैं और पक्षियों की भाँति एक-एक दाना चुगते हुए जीवनयापन करते हैं॥ 99॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.99 
वालखिल्यास्तप:सिद्धा मुनय: सूर्यमण्डले।
उञ्छे तिष्ठन्ति धर्मज्ञा: शाकुनीं वृत्तिमास्थिता:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
वालखिल्य तप द्वारा सिद्धि प्राप्त ऋषि हैं। वे सब धर्मों के ज्ञाता हैं और सूर्यमण्डल में निवास करते हैं। वहाँ वे निःस्वार्थता का आचरण करते हैं और पक्षियों की भाँति एक-एक दाना चुगते हुए जीवनयापन करते हैं॥ 99॥
 
The Valakhilyas are sages who have attained perfection through penance. They are the knowers of all religions and reside in the solar system. There they adopt the habit of selflessness and live like birds by picking up grains one by one.॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)