श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  13.146.96 
फेनपानामृषीणां यो धर्मो धर्मविदां सताम्।
तन्मे शृणु महाभागे धर्मज्ञे धर्ममादित:॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ पुरुष! हे धर्म के ज्ञाता! सबसे पहले मुझसे धर्म के विशेषज्ञ ऋषियों के धर्म का वर्णन सुनिए।
 
O great man! O knower of religion! First of all, listen to me about the description of the religion of the sages who are experts in religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)