श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  13.146.89 
चतुर्विधा भिक्षवस्ते कुटीचकबहूदकौ।
हंस: परमहंसश्च यो य: पश्चात् स उत्तम:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
संन्यासी चार प्रकार के होते हैं - कुटीचक, बहुदक, हंस और परमहंस। इनमें से परमहंस श्रेष्ठ है।
 
There are four types of sanyasis- Kutichak, Bahudak, Hans and Paramhansa. The latter is the best among them. 89.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)