श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  13.146.88 
एष मोक्षविदां धर्मो वेदोक्त: सत्पथ: सताम्।
यो मार्गमनुयातीमं पदं तस्य च विद्यते॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
यह मोक्षमार्ग को जानने वाले सत्पुरुषों का वेदों द्वारा प्रतिपादित धर्म और सत्यमार्ग है। जो इस मार्ग का अनुसरण करता है, वह ब्रह्मपद को प्राप्त करता है ॥88॥
 
This is the religion and right path propounded by the Vedas of good men who know the path of salvation. One who follows this path attains Brahmapada. 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)