श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  13.146.80 
निवृत्तिलक्षणस्त्वन्यो धर्मो मोक्षाय तिष्ठति।
तस्य वृत्तिं प्रवक्ष्यामि शृणु मे देवि तत्त्वत:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त एक संन्यास धर्म भी है। वह मोक्ष का साधन है। देवि! मैं तुम्हें उसका वास्तविक स्वरूप बताता हूँ, उसे सुनो। 80।
 
Apart from this, there is a religion of retirement. It is the means of liberation. Devi! I will tell you its true nature, listen to it. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)