श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.146.8 
इन्द्रेण च पुरा व्रजं क्षिप्तं श्रीकाङ्क्षिणा मम।
दग्ध्वा कण्ठं तु तद् यातं तेन श्रीकण्ठता मम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में इन्द्र ने मेरा नाम पाने की इच्छा से मुझ पर वज्र से प्रहार किया था। वह वज्र मेरे कंठ को जलाकर दूर चला गया। इस कारण मैं श्रीकंठ नाम से प्रसिद्ध हुआ। 8॥
 
In earlier times, Indra had attacked me with a thunderbolt with the desire to get my name. That thunderbolt burned my throat and went away. Due to this I became famous by the name Shrikanth. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)