श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  13.146.76 
प्रवृत्तिलक्षणो धर्मो गृहस्थेषु विधीयते।
तमहं वर्तयिष्यामि सर्वभूतहितं शुभम्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
गृहस्थों के लिए कर्म-धर्म बताया गया है। वह समस्त प्राणियों के लिए कल्याणकारी और मंगलकारी है। अब मैं उसका वर्णन करूँगा ॥ 76॥
 
The religion of action has been prescribed for householders. It is beneficial and auspicious for all beings. Now I will describe it. ॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)