श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.146.7 
जटिलो ब्रह्मचारी च लोकानां हितकाम्यया।
देवकार्यार्थसिद्‍ध्यर्थं पिनाकं मे करे स्थितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं प्रजा का कल्याण करने के लिए जटाधारी ब्रह्मचारी का वेश धारण करके रहता हूँ। देवताओं का कल्याण करने के लिए पिनाक सदैव मेरे हाथ में रहता है। 7.
 
To do good to the people I live in the guise of a brahmacari with matted hair. To do good to the gods Pinaka is always in my hand. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)