श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  13.146.69 
नित्य: स्वाध्यायिता धर्मो धर्मो यज्ञ: सनातन:।
दानं प्रशस्यते चास्य यथाशक्ति यथाविधि॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
इनमें ब्राह्मण का मुख्य धर्म है - सदैव स्वाध्यायशील रहना, यज्ञ करना सनातन धर्म है तथा यथाशक्ति विधिपूर्वक दान देना ही उसके लिए श्रेष्ठ धर्म है।
 
Among these, the main religion of a Brahmin is to always be self-studying, performing yajna is the eternal religion and giving charity according to one's capacity in a prescribed manner is the best religion for him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)