श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  13.146.68 
यजनं याजनं चैव तथा दानप्रतिग्रहौ।
अध्यापनं चाध्ययनं षट्कर्मा धर्मभाग् द्विज:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ करना और करवाना, दान देना, दान लेना, वेदों का पढ़ना और पढ़ाना - इन छह कर्मों का आश्रय लेने वाला ब्राह्मण धर्म का भागी होता है।
 
Performing and getting yajnas performed, giving alms, accepting alms, reading and teaching the Vedas. A Brahmin who takes recourse to these six deeds is a part of the religion. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)