Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.66: जो विद्वान है और तीनों वेदों को जानता है; जो अध्ययन या अध्यापन से अपनी जीविका नहीं चलाता; जो सदैव दान, धर्म और यज्ञ- इन तीनों कर्मों का पालन करता है; जिसने काम, क्रोध और लोभ- इन तीनों विकारों का त्याग कर दिया है तथा जो सभी प्राणियों के प्रति मैत्रीभाव रखता है - ऐसा पुरुष सच्चा ब्राह्मण माना जाता है। | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो विद्वान है और तीनों वेदों को जानता है; जो अध्ययन या अध्यापन से अपनी जीविका नहीं चलाता; जो सदैव दान, धर्म और यज्ञ- इन तीनों कर्मों का पालन करता है; जिसने काम, क्रोध और लोभ- इन तीनों विकारों का त्याग कर दिया है तथा जो सभी प्राणियों के प्रति मैत्रीभाव रखता है - ऐसा पुरुष सच्चा ब्राह्मण माना जाता है।
He who is a scholar and knows the three Vedas; who does not earn his livelihood by studying or teaching; who always performs the three deeds of charity, religion and sacrifice; who has given up the three vices of lust, anger and greed and who has friendship towards all creatures - such a man is considered a true Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥