Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.62-63: श्री महेश्वर बोले - देवि ! पुण्य की इच्छा रखने वाले जगत् के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने समस्त लोकों का उद्धार करने के लिए इस मृत्युलोक में सारभूत ब्रह्म द्वारा ब्राह्मणों को उत्पन्न किया है । ब्राह्मण इस पृथ्वी के देवता हैं, अतः पहले मैं उनके धार्मिक कर्मों और उनके फलों का वर्णन करता हूँ, क्योंकि ब्राह्मणों द्वारा किया गया धर्म ही परम धर्म माना गया है । 62-63॥ | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
ब्राह्मणा लोकसारेण सृष्टा धात्रा गुणार्थिना।
लोकांस्तारयितुं कृत्स्नान् मर्त्येषु क्षितिदेवता:॥ ६२॥
तेषामपि प्रवक्ष्यामि धर्मकर्मफलोदयम्।
ब्राह्मणेषु हि यो धर्म: स धर्म: परमो मत:॥ ६३॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवि ! पुण्य की इच्छा रखने वाले जगत् के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने समस्त लोकों का उद्धार करने के लिए इस मृत्युलोक में सारभूत ब्रह्म द्वारा ब्राह्मणों को उत्पन्न किया है । ब्राह्मण इस पृथ्वी के देवता हैं, अतः पहले मैं उनके धार्मिक कर्मों और उनके फलों का वर्णन करता हूँ, क्योंकि ब्राह्मणों द्वारा किया गया धर्म ही परम धर्म माना गया है । 62-63॥
Shri Maheshwar said – Goddess! Lord Brahma, the creator of the world who desires virtues, has created Brahmins in the mortal world through the essence of the world to save all the worlds. Brahmins are the gods of this earth, hence first I describe their religious activities and their fruits, because the religion practiced by Brahmins is considered the supreme religion. 62-63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥