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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
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श्लोक 60
श्लोक
13.146.60
एतत् ते सर्वमाख्यातं चातुर्वर्ण्यस्य शोभने।
एकैकस्येह सुभगे किमन्यच्छ्रोतुमिच्छसि॥ ६०॥
अनुवाद
शोभने! इस प्रकार मैंने तुम्हें चारों वर्णों का सम्पूर्ण धर्म एक-एक करके समझाया है। शुभगे! अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥60॥
Shobhane! In this way I have explained to you the entire religion of the four Varnas one by one. Shubhage! What else do you want to hear?॥ 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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