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mahabharat 13.146.6: पश्चिम की ओर वाला मेरा मुख सौम्य है और सभी जीवों को सुख देने वाला है तथा दक्षिण की ओर वाला मेरा भयानक मुख भयंकर है और सभी लोगों का नाश करने वाला है।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.6 
पश्चिमं मे मुखं सौम्यं सर्वप्राणिसुखावहम्।
दक्षिणं भीमसंकाशं रौद्रं संहरति प्रजा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पश्चिम की ओर वाला मेरा मुख सौम्य है और सभी जीवों को सुख देने वाला है तथा दक्षिण की ओर वाला मेरा भयानक मुख भयंकर है और सभी लोगों का नाश करने वाला है।
 
My face facing west is gentle and gives happiness to all living beings and my terrifying face facing south is fierce and destroys all people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)