श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.146.59 
नित्यं स हि शुभाचारो देवताद्विजपूजक:।
शूद्रो धर्मफलैरिष्टै: सम्प्रयुज्येत बुद्धिमान्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जो बुद्धिमान शूद्र प्रतिदिन सदाचार का पालन करता है और देवताओं तथा ब्राह्मणों की पूजा करता है, उसे धर्म का मनोवांछित फल प्राप्त होता है ॥59॥
 
An intelligent Shudra who daily follows good conduct and worships Gods and Brahmins gets the desired results of Dharma. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)