Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.146.5: मैं पूर्वाभिमुख होकर इन्द्रपद को अनुशासित करता हूँ। हे अनिन्दित! उत्तराभिमुख होकर आपसे बात करने में मुझे आनन्द आता है। ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.146.5 
पूर्वेण वदनेनाहमिन्द्रत्वमनुशास्मि ह।
उत्तरेण त्वया सार्धं रमाम्यहमनिन्दिते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैं पूर्वाभिमुख होकर इन्द्रपद को अनुशासित करता हूँ। हे अनिन्दित! उत्तराभिमुख होकर आपसे बात करने में मुझे आनन्द आता है। ॥5॥
 
I discipline Indrapada with my face facing east. O Anindite! I enjoy talking with you with my face facing north. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)