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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
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श्लोक 48
श्लोक
13.146.48
प्रजा: पालयते यो हि धर्मेण मनुजाधिप:।
तस्य धर्मार्जिता लोका: प्रजापालनसंचिता:॥ ४८॥
अनुवाद
जो राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा पर शासन करता है, वह अपने शासन के प्रभाव से उत्तम लोकों को प्राप्त करता है ॥ 48॥
A king who rules over his subjects righteously, attains the best worlds by the effect of his duty of ruling over his subjects. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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