श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.146.46 
यस्तु क्षत्रगतो देवि मया धर्म उदीरित:।
तमहं ते प्रवक्ष्यामि तन्मे शृणु समाहिता॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
देवि! अब मैं तुम्हें अपने द्वारा बताया गया क्षत्रिय धर्म बता रहा हूँ। तुम ध्यानपूर्वक मेरी बात सुनो ॥ 46॥
 
Goddess! I am now describing to you the Kshatriya Dharma as told by me. Please listen to me with full attention. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)