श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.146.42 
भुक्ते परिजने पश्चाद् भोजनं धर्म उच्यते।
ब्राह्मणस्य गृहस्थस्य श्रोत्रियस्य विशेषत:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
परिवार के सदस्यों के भोजन कर लेने के बाद भोजन करना गृहस्थ ब्राह्मण, विशेषतः श्रोत्रिय का मुख्य कर्तव्य है ॥ 42॥
 
Eating after the family members have finished their meal is the main duty of a householder Brahmin, especially a Shrotri. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)