श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.146.39 
आहिताग्निरधीयानो जुह्वान: संयतेन्द्रिय:।
विघसाशी यताहारो गृहस्थ: सत्यवाक् शुचि:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
गृहस्थ को चाहिए कि वह नियमित अग्निहोत्र करने वाला, स्वाध्यायी, गृहस्थ में श्रद्धा रखने वाला, तीक्ष्ण इन्द्रियों वाला, विघ्नों का नाश करने वाला, मितव्ययी, सत्यवादी और पवित्र हो ॥39॥
 
A householder should be a person who performs Agnihotra regularly, is self-studying, devoted to his home, a person with keen senses, a destroyer of obstacles, a frugal person, truthful and pure. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)