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श्लोक  13.146.38 
शूद्रान्नवर्जनं धर्मस्तथा सत्पथसेवनम्।
धर्मो नित्योपवासित्वं ब्रह्मचर्यं तथैव च॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण को शूद्र का अन्न नहीं खाना चाहिए, यही उसका धर्म है। सन्मार्ग पर चलना, प्रतिदिन उपवास करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना भी धर्म है। 38.
 
A Brahmin should not eat the food of a Shudra, this is his Dharma. Following the right path, daily fasting and observing celibacy is also Dharma. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)