श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.146.37 
गुरुणा चाभ्यनुज्ञात: समावर्तेत वै द्विज:।
विन्देतानन्तरं भार्यामनुरूपां यथाविधि॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मचर्य की अवधि पूरी होने पर द्विज को अपने गुरु की अनुमति लेनी चाहिए और फिर घर लौटकर विधिपूर्वक योग्य स्त्री से विवाह करना चाहिए ॥37॥
 
After the completion of the period of celibacy the twice-born should take the permission of his Guru and then after returning home should marry a suitable woman in accordance with the rituals. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)