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mahabharat 13.146.36: ब्रह्मचारी के लिए भैक्षचर्या (गाँव-गाँव जाकर भिक्षा माँगकर गुरु को अर्पित करना) परम धर्म है। प्रतिदिन जनेऊ धारण करना, प्रतिदिन वेदों का अध्ययन करना और ब्रह्मचर्य आश्रम के नियमों का पालन करना ब्रह्मचारी के मुख्य कर्तव्य हैं। 36.   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.36 
भैक्षचर्या परो धर्मो नित्ययज्ञोपवीतिता।
नित्यं स्वाध्यायिता धर्मो ब्रह्मचर्याश्रमस्तथा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मचारी के लिए भैक्षचर्या (गाँव-गाँव जाकर भिक्षा माँगकर गुरु को अर्पित करना) परम धर्म है। प्रतिदिन जनेऊ धारण करना, प्रतिदिन वेदों का अध्ययन करना और ब्रह्मचर्य आश्रम के नियमों का पालन करना ब्रह्मचारी के मुख्य कर्तव्य हैं। 36.
 
For a brahmacari, Bhaikscharya (begging alms from villages and offering it to the Guru) is the ultimate religion. Wearing the sacred thread every day, studying the Vedas every day and being engaged in following the rules of Brahmacharya Ashram are the main duties of a brahmacari. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)