श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.146.35 
श्रीमहेश्वर उवाच
रहस्यश्रवणं धर्मो वेदव्रतनिषेवणम्।
अग्निकार्यं तथा धर्मो गुरुकार्यप्रसाधनम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - धर्म के रहस्यों को सुनना, वेदों में लिखे व्रतों का पालन करना, होम करना और गुरु की सेवा करना - यही ब्रह्मचर्य-आश्रम का धर्म है ॥35॥
 
Shri Maheshwar said - listening to the secrets of religion, observing the vows written in the Vedas, performing Homa and serving the Guru - this is the religion of celibacy-ashram. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)