श्रीमहेश्वर उवाच
रहस्यश्रवणं धर्मो वेदव्रतनिषेवणम्।
अग्निकार्यं तथा धर्मो गुरुकार्यप्रसाधनम्॥ ३५॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - धर्म के रहस्यों को सुनना, वेदों में लिखे व्रतों का पालन करना, होम करना और गुरु की सेवा करना - यही ब्रह्मचर्य-आश्रम का धर्म है ॥35॥
Shri Maheshwar said - listening to the secrets of religion, observing the vows written in the Vedas, performing Homa and serving the Guru - this is the religion of celibacy-ashram. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)