श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.146.34 
उमोवाच
भगवन् संशयो मेऽस्ति तन्मे व्याख्यातुमर्हसि।
चातुर्वर्ण्यस्य धर्मं वै नैपुण्येन प्रकीर्तय॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उसने कहा- हे प्रभु! मेरे मन में अभी भी कुछ संदेह है। अतः कृपया मुझे समझाएँ। चारों वर्णों के धर्म को विस्तार से समझाएँ।
 
He said- O Lord! There is still some doubt in my mind. So please explain it to me. Please explain the religion of the four castes in full detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)