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mahabharat 13.146.32: देवी! उसे धर्म का अनुष्ठान करना चाहिए और विधिपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत के पालन के साथ-साथ उपनयन संस्कार भी उसके लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि तभी वह द्विज बनता है। 32.   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.32 
तस्य धर्मक्रिया देवि ब्रह्मचर्या च न्यायत:।
व्रतोपनयनं चैव द्विजो येनोपपद्यते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
देवी! उसे धर्म का अनुष्ठान करना चाहिए और विधिपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत के पालन के साथ-साथ उपनयन संस्कार भी उसके लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि तभी वह द्विज बनता है। 32.
 
Devi! He should perform the rituals of religion and follow celibacy as per the law. It is very important for him to have the Upanayan ceremony along with the observance of the vow, because only then he becomes a Dwija. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)