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श्लोक  13.146.31 
उपवास: सदा धर्मो ब्राह्मणस्य न संशय:।
स हि धर्मार्थसम्पन्नो ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि व्रत (इन्द्रिय संयम) ब्राह्मण के लिए सदैव धर्म बताया गया है। दानशील ब्राह्मण ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है। 31॥
 
There is no doubt that fasting (control of senses) has always been declared as Dharma for a Brahmin. A charitable Brahmin attains Brahmabhav. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)