श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.146.29 
ब्राह्मणे कीदृशो धर्म: क्षत्रिये कीदृशोऽभवत्।
वैश्ये किंलक्षणो धर्म: शूद्रे किंलक्षणो भवेत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण के लिए धर्म का क्या स्वरूप है, क्षत्रिय के लिए क्या स्वरूप है, वैश्य के लिए धर्म के क्या लक्षण हैं और शूद्र के धर्म के क्या लक्षण हैं?॥29॥
 
What is the nature of religion for a Brahmin, what is it for a Kshatriya, what are the characteristics of religion useful for a Vaishya and what are the characteristics of the religion of a Shudra?॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)