vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
»
श्लोक 28
श्लोक
13.146.28
उमोवाच
भगवन् संशय: पृष्ठस्तन्मे शंसितुमर्हसि।
चातुर्वर्ण्यस्य यो धर्म: स्वे स्वे वर्णे गुणावह:॥ २८॥
अनुवाद
उसने पूछा - हे प्रभु! मुझे एक और संदेह है; कृपया मुझे चारों वर्णों का वह धर्म बताइए जो उनके लिए हितकर हो।
She asked - O Lord! I have one more doubt; please tell me the Dharma of the four Varnas which is beneficial for their respective Varnas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×