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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
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श्लोक 23
श्लोक
13.146.23
धर्म: किंलक्षण: प्रोक्त: कथं वा चरितुं नरै:।
शक्यो धर्ममविन्दद्भिर्धर्मज्ञ वद मे प्रभो॥ २३॥
अनुवाद
हे प्रभु! हे धर्म के ज्ञाता! धर्म के लक्षण क्या हैं? और जो धर्म को नहीं जानते, वे उसका आचरण कैसे कर सकते हैं? कृपया मुझे यह बताइए॥ 23॥
Lord! O knower of Dharma! What are the characteristics of Dharma? And how can those who do not know Dharma practise it? Please tell me this.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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