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श्लोक  13.146.23 
धर्म: किंलक्षण: प्रोक्त: कथं वा चरितुं नरै:।
शक्यो धर्ममविन्दद्भिर्धर्मज्ञ वद मे प्रभो॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे धर्म के ज्ञाता! धर्म के लक्षण क्या हैं? और जो धर्म को नहीं जानते, वे उसका आचरण कैसे कर सकते हैं? कृपया मुझे यह बताइए॥ 23॥
 
Lord! O knower of Dharma! What are the characteristics of Dharma? And how can those who do not know Dharma practise it? Please tell me this.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)