श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.146.2 
साभ्यगच्छत मां देवि रूपेणाप्रतिमा भुवि।
प्रदक्षिणं लोभयन्ती मां शुभे रुचिरानना॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे शुभ्र! इस पृथ्वी पर तिलोत्तमा की सुन्दरता अद्वितीय है। वह सुन्दरी मुझे मोहित करती हुई मेरे चारों ओर चक्कर लगाने आई है॥2॥
 
Goddess! O auspicious one! Tilottama's beauty is unmatched on this earth. That beautiful girl came to circle around me, luring me.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)