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mahabharat 13.146.19: शुभ! मैंने इस श्मशान को अपने लिए पवित्र और दिव्य स्थान माना है। यह परम पवित्र स्थान है। पवित्र वस्तुओं की इच्छा रखने वाले भक्त इस स्थान की पूजा करते हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.19 
एष वासो हि मे मेध्य: स्वर्गीयश्च मत: शुभे।
पुण्य: परमकश्चैव मेध्यकामैरुपास्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
शुभ! मैंने इस श्मशान को अपने लिए पवित्र और दिव्य स्थान माना है। यह परम पवित्र स्थान है। पवित्र वस्तुओं की इच्छा रखने वाले भक्त इस स्थान की पूजा करते हैं॥19॥
 
Shubh! I have considered this cremation ground as sacred and heavenly place for me. This is the most holy place. Devotees who desire sacred things worship this place.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)