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mahabharat 13.146.18: हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! मेरे ये भूत श्मशान में ही रमण करते हैं। मैं इन भूतों के बिना कहीं नहीं रह सकता॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.18 
तत्र चैव रमन्तीमे भूतसंघा: शुचिस्मिते।
न च भूतगणौर्देवि विनाहं वस्तुमुत्सहे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! मेरे ये भूत श्मशान में ही रमण करते हैं। मैं इन भूतों के बिना कहीं नहीं रह सकता॥18॥
 
O Goddess with a pure smile! These ghosts of mine enjoy themselves only in the crematorium. I cannot live anywhere without these ghosts.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)