श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.146.16 
श्रीमहेश्वर उवाच
मेध्यान्वेषी महीं कृत्स्नां विचराम्यनिशं सदा।
न च मेध्यतरं किंचित् श्मशानादिह लक्ष्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - हे प्रिये! मैं दिन-रात सारी पृथ्वी पर पवित्र स्थान की खोज में घूमता रहता हूँ, किन्तु मुझे श्मशान से अधिक पवित्र कोई स्थान नहीं मिलता॥16॥
 
Sri Maheshwar said - Dear one! I roam all over the earth day and night in search of a holy place, but I do not find any place more holy than the cremation ground.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)