Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.14-15: श्मशान भूमि बालों और हड्डियों से भरी हुई है। उस भयानक भूमि में मनुष्यों की खोपड़ियाँ और मटके पड़े हैं। वहाँ गिद्धों और सियारों के समूह एकत्रित होते हैं। चारों ओर चिताएँ जल रही हैं। मांस, चर्बी और रक्त का मैल फैला हुआ है। वहाँ हड्डियों के ढेर लगे हैं, जिनमें आँतें बिखरी हुई हैं और सियारों का आर्तनाद गूँजता रहता है। तुम ऐसे अपवित्र स्थान में क्यों रहते हो?॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्मशान भूमि बालों और हड्डियों से भरी हुई है। उस भयानक भूमि में मनुष्यों की खोपड़ियाँ और मटके पड़े हैं। वहाँ गिद्धों और सियारों के समूह एकत्रित होते हैं। चारों ओर चिताएँ जल रही हैं। मांस, चर्बी और रक्त का मैल फैला हुआ है। वहाँ हड्डियों के ढेर लगे हैं, जिनमें आँतें बिखरी हुई हैं और सियारों का आर्तनाद गूँजता रहता है। तुम ऐसे अपवित्र स्थान में क्यों रहते हो?॥14-15॥
The cremation ground is filled with hair and bones. Human skulls and pots lie in that dreadful land. Crowds of vultures and jackals gather there. There are pyres burning everywhere. There is a filth of flesh, fat and blood. There are heaps of bones with scattered intestines and the howling of female jackals keeps echoing there. Why do you live in such an unholy place?॥14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥