Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.111-112: सांसारिक सुखों से विरत रहना, गाय का दूध पीना, संयम के साधनों से प्रेम करना, खुली भूमि पर सोना, योगाभ्यास करना, शाक खाना, फल-मूल खाना, वायु, जल और अन्न पर निर्वाह करना - ये ऋषियों के नियम हैं। इनका पालन करके वे अजेयता की सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सांसारिक सुखों से विरत रहना, गाय का दूध पीना, संयम के साधनों से प्रेम करना, खुली भूमि पर सोना, योगाभ्यास करना, शाक खाना, फल-मूल खाना, वायु, जल और अन्न पर निर्वाह करना - ये ऋषियों के नियम हैं। इनका पालन करके वे अजेयता की सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त करते हैं।
To abstain from worldly pleasures, to eat cow's milk, to love the means of self-control, to sleep on open ground, to practice yoga, to eat vegetables, to live on fruits and roots, to live on air, water and food - these are the rules of the sages. By following these, they achieve the highest state of being unconquerable.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥